
नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा सदस्य बनने की दावेदारी ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। विपक्षी नेता उन्हें जनता के साथ धोखा देने का दोषी ठहरा रहे हैं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नीतीश कुमार ईबीसी के दम पर सत्ता में आए, लेकिन 20 सालों में उनके लिए कुछ नहीं किया। न तो विश्वविद्यालय बने, न कॉलेज खुले, विशेष कोटा भी पूरा नहीं हुआ। मात्र सतही अभियान चलाए गए। एक मुख्यमंत्री का राज्यसभा जाना पूरी तरह गलत है। नामांकन के बाद उनकी कोई पूछ रहेगी ही नहीं। यह ईबीसी के साथ सीधा विश्वासघात है।
समाजवादी पार्टी के फखरुल हसन चांद ने इसे भाजपा की बैकडोर रणनीति बताया। बिहार में नीतीश के नाम पर सरकार बनी, अब भाजपा अपना मुखिया थोपना चाहती है। जहां भाजपा सत्ता में है, वहां विकास के बजाय सांप्रदायिक माहौल खराब हो रहा है।
नीतीश ने एक्स पर पोस्ट कर पुष्टि की। उन्होंने लिखा कि संसदीय जीवन से ही उनकी इच्छा रही है कि बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनें। इसी कड़ी में राज्यसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
उधर, उदित राज ने नेपाल के 2026 चुनाव पर चिंता जताई। पड़ोसी देशों में लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए। लोकतंत्र में संवाद होता है, तानाशाही या अराजकता में नहीं। सभी दलों को बराबर अवसर मिले। नेपाल को लोकतांत्रिक व्यवस्था की सख्त जरूरत है।
बिहार की सियासत में यह कदम गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है। विकास और सांप्रदायिक सद्भाव की चुनौतियों के बीच नीतीश का फैसला भविष्य की दिशा तय करेगा।