
16 मार्च 2026 को 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है। वर्तमान में इनमें से 25 सीटें इंडिया गठबंधन के पास हैं, जबकि एनडीए के पास 12। जानकारों का अनुमान है कि एनडीए को 5-6 सीटों का लाभ मिल सकता है, जो ऊपरी सदन के समीकरण को बदल सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बिहार दौरा इसकी तैयारी का हिस्सा है। सीएम नीतीश कुमार के साथ उनकी मुलाकात एनडीए की मजबूत एकजुटता का प्रतीक है। नामांकन प्रक्रिया में दोनों की सक्रियता से साफ है कि गठबंधन रणनीति पर कायम है।
कई दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है—महाराष्ट्र से शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले; तमिलनाडु से थंबीदुरई, तिरुचि शिवा, कनिमोझी, सोमू; बंगाल से गोखले, भट्टाचार्य, बख्शी; बिहार से कुशवाहा, ठाकुर, हरिवंश। भाजपा ने अठावले को दोबारा नामित किया है।
नए चेहरे उभर सकते हैं—बिहार से नीतीश कुमार, नितिन नवीन, विनोद तावड़े, शिवेश राम, संजय भाटिया, पार्थ पवार। बिहार की पांच सीटें सबसे रोमांचक, जहां 41 वोट जरूरी। एनडीए के 202 विधायक हैं, स्वीप के लिए 205 चाहिए। विपक्ष की एकजुटता से 4-1 संभव, लेकिन क्रॉस वोटिंग जोखिम। एनडीए फॉर्मूला: भाजपा-2, जदयू-2, सहयोगी-1।
महाराष्ट्र की सात सीटें—288 विधानसभा, 37 वोट/सीट। महायुति के 235 से छह आसान, लेकिन शेयरिंग विवाद: सिंधिया शिवसेना 2 चाहती, भाजपा 3+1 पर अड़ी। पवार उतरें तो खतरा।
तमिलनाडु: डीएमके-4, एआईएडीएमके-1, एक मुकाबला। बंगाल: टीएमसी-4, भाजपा लेफ्ट पर। ओडिशा: भाजपा-3 संभव। असम, हरियाणा, छग बंटवारा; तेलंगाना-हिमाचल कांग्रेस।
एनडीए को 4-6 लाभ, भाजपा 9 से 13। इंडिया को 4-5 नुकसान। यह चुनाव राज्यसभा का भविष्य तय करेगा, बिहार-महाराष्ट्र निर्णायक।