
भोपाल के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल में एक और दर्दनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। सहायक प्रोफेसर डॉक्टर सृष्टि ने कथित तौर पर अपने विभागाध्यक्ष डॉक्टर परवेज की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर नशीली दवा का ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भोपाल पुलिस, अस्पताल प्रबंधन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस थमा दिया है।
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट साझा कर बताया कि शिकायत में डॉक्टर सृष्टि द्वारा तीन बार प्रताड़ना की शिकायत करने के बावजूद प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा मामले को दबाने की कोशिश की गई। आखिरकार, टूट चुकी डॉक्टर ने यह कदम उठा लिया।
कानूनगो ने कहा, ‘यह शिकायत बेहद गंभीर है। सभी पक्षों को जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। पीड़ित परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। एक होनहार डॉक्टर का नुकसान अत्यंत दुखद है। दोषियों को सजा दिलाना और व्यवस्था में सुधार हमारा संकल्प है।’
इससे पहले भी एम्स भोपाल में ऐसी ही घटना घटी थी। इमरजेंसी विभाग की डॉक्टर रश्मि वर्मा 11 दिसंबर को हॉस्टल रूम में बेहोश मिलीं। नशीली इंजेक्शन के ओवरडोज से उनकी हालत गंभीर हो गई। 25 दिनों की जद्दोजहद के बाद उनकी मौत हो गई। मौके से सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने खुद को जिम्मेदार ठहराया।
ये लगातार हो रही घटनाएं चिकित्सा संस्थानों में कार्यस्थल पर उत्पीड़न और मानसिक तनाव की गंभीर समस्या उजागर करती हैं। उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों।