
वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस स्वायत्त हथियारों के प्रयोग की आधिकारिक पुष्टि की है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के ब्रिफिंग में रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को यह जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि ड्रोन और अन्य प्रणालियों में स्मार्ट एआई तकनीक का व्यापक उपयोग हो रहा है, लेकिन विस्तृत ब्यौरा गोपनीय रखा गया है। आधुनिक युद्ध में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, जो निगरानी, लक्ष्य चयन और हमलों में क्रांति ला रही है।
अभियान के दायरे में लंबी दूरी के हमले, नौसैनिक कार्रवाइयां और सटीक हवाई छापेमारी शामिल हैं, जिनका मकसद ईरान की सैन्य ताकत को चूर करना है। संयुक्त सैन्य प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया कि पहले चरण में 2,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर प्रहार हो चुके हैं।
तीन प्रमुख लक्ष्य हैं—ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों का सफाया, नौसेना का विनाश और सैन्य पुनर्निर्माण रोकना। केन ने स्पष्ट किया, ‘सबसे पहले मिसाइल सिस्टम, फिर नौसेना, उसके बाद पुनरुद्धार की कवायद थामना।’
रणनीति में बदलाव आया है—दूर से हमलों से अब सीधे हवाई क्षेत्र में सटीक प्रहार। ईरानी मिसाइल दाग की संख्या पहले दिन के मुकाबले 86 प्रतिशत घटी है। फिर भी, खतरा बरकरार है। ‘ये जटिल और जोखिम भरे अभियान हैं, अभी समाप्त नहीं हुए।’
मिसाइल आदान-प्रदान और परमाणु विवाद से उपजा यह संघर्ष मध्य पूर्व में वर्षों का सबसे घातक टकराव है। एआई हथियारों के दौर में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है।