
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ रही हिंसा ने संयुक्त राष्ट्र को गहरी चिंता में डाल दिया है। अफगानिस्तान में मानवाधिकारों पर विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट ने सीमा पर हो रही झड़पों से आम नागरिकों की भारी क्षति पर यूएनएएमए की चिंताओं का समर्थन किया है।
बेनेट ने एक्स पर पोस्ट के जरिए दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार व मानवीय कानूनों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संवाद ही स्थायी समाधान का एकमात्र रास्ता है।
यूएनएएमए ने 26 फरवरी से 2 मार्च तक 146 नागरिक हताहत दर्ज किए, जिसमें 42 मौतें और 104 घायल शामिल हैं। इनमें महिलाएं व बच्चे भी थे। अप्रत्यक्ष गोलाबारी ने पकत्या, पक्तिका, नंगरहार, कुनार व खोस्त के आबादी वाले इलाकों को नुकसान पहुंचाया। पक्तिका व नंगरहार में हवाई हमलों से भी क्षति हुई।
ओसीएचए के आंकड़ों से इन प्रांतों में करीब 16,400 परिवार बेघर हो गए। कुनार में अगस्त 2025 के भूकंप से प्रभावित सैकड़ों परिवारों को जोखिम वाले इलाकों से हटने की सलाह दी गई।
संघर्ष ने मानवीय सहायता को बुरी तरह प्रभावित किया है। पाकिस्तान से लौट रहे अफगानों की स्थिति सबसे नाजुक है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने वितरण रोका, जिससे 1.6 लाख लोग प्रभावित हुए। कई प्रांतों में कुपोषण गंभीर रूप ले चुका है।
अफगानिस्तान की मानवीय स्थिति पहले से ही खराब थी, अब यह और बिगड़ गई। यूएनएएमए ने सभी पक्षों से कानूनी जिम्मेदारियों का पालन कर नागरिकों की रक्षा करने को कहा। संयम और बातचीत ही आगे का रास्ता है।