
आज की व्यस्त जिंदगी में स्वास्थ्य बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया है। अनियमित खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता गंभीर बीमारियों को न्योता दे रही हैं। ऐसे में योग और प्राणायाम ही सच्चा सहारा हैं, जिनमें उड्डियान बंध एक अनमोल कला के रूप में उभर रहा है।
आयुष मंत्रालय द्वारा प्रोत्साहित यह अभ्यास केवल व्यायाम नहीं, बल्कि उदर क्षेत्र को मजबूत कर शरीर को अंदरूनी रूप से पवित्र करने का साधन है। इसे ‘पेट का ताला’ भी कहा जाता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है और मांसपेशियों को आकर्षक रूप देता है।
सही तरीके से करने के लिए पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में विराजें। हथेलियां घुटनों पर रखें, मुंह से पूर्ण श्वास बाहर फेंकें। थोड़ा श्वास अंदर लें, रोकें और जालंधर बंध लगाएं। अब उदर की मांसपेशियों को अंदर-ऊपर खींचें।
श्वास को सहजता से धारण करें, जालंधर बंध धीरे छोड़ें, श्वास ग्रहण करें और पेट को शिथिल होने दें। नियमित अभ्यास से पाचनतंत्र सशक्त होता है, ऊर्जा का संचार बढ़ता है तथा मन को शांति मिलती है।
यह शक्तिशाली क्रिया पूर्ण श्वास त्याग कर उदर को रीढ़नाल की ओर संकुचित करती है। आधुनिक जीवनशैली की कमियों को दूर करने के लिए इसे अपनाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।