
कर्नाटक की सियासत में हंगामा मच गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह केएसआईसी की टी. नरसिपुरा इकाई के विस्तार के लिए चिह्नित पांच एकड़ जमीन पर कब्जा कर तालुक स्टेडियम बनाने की साजिश रच रही है। इससे विश्वविख्यात मैसूर सिल्क ब्रांड का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
अशोक ने एक बयान में बताया कि केएसआईसी के प्रबंध निदेशक ने विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें उत्पादन क्षमता बढ़ाने और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए इस जमीन की अनिवार्यता बताई गई। आंतरिक तकनीकी रिपोर्ट में भी आपत्ति दर्ज की गई, फिर भी सरकार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि लाभदायक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को क्यों कमजोर किया जा रहा? किसके हित सध रहे हैं? इकाई को सिल्क रीलिंग के लिए प्रतिदिन पांच लाख लीटर पानी चाहिए, जो स्टेडियम निर्माण से बाधित हो सकता है, उत्पादन ठप्प हो जाएगा।
सैकड़ों मजदूरों और हजारों रेशम किसानों की आजीविका दांव पर है। फैक्टरी नियमों के तहत 30 प्रतिशत भूमि हरी क्षेत्र के रूप में रखनी जरूरी, उल्लंघन से संचालन बंदी का खतरा। मैसूर सिल्क को मैसूर वोडेयार काल का जीआई टैग वाला धरोहर ब्रांड बताते हुए अशोक ने सरकार से इसे मजबूत करने की मांग की।
प्रस्ताव वापस लें और केएसआईसी का भविष्य सुरक्षित करें, अशोक ने अपील की। उन्होंने मामला पीएमओ, कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष रखा है।