
नई दिल्ली। हिंदू परंपरा में पंचांग दैनिक जीवन का मार्गदर्शक है, जो शुभ-अशुभ समय, तिथि-नक्षत्र योग की सटीक जानकारी प्रदान करता है। 5 मार्च को गुरुवार को कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि सायं 5:03 तक रहेगी, उसके बाद तृतीया प्रारंभ होगी। उदयातिथि अनुसार संपूर्ण दिन द्वितीया ही प्रभावी रहेगी।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रातः 8:17 तक, तत्पश्चात हस्त नक्षत्र। शूल योग सुबह 7:46 तक, तथा गर करण सायं 5:03 तक चलेगा।
शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:04 से 5:53 तक। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:09 से 12:56 तक, जिसमें विजय मुहूर्त 2:30 से 3:16 तक का संयोग विशेष है। ये नवप्रवर्तन, शुभकार्यों व निर्णयों हेतु सर्वोत्तम। गोधूलि मुहूर्त सायं 6:21 से 6:46 तक।
सूर्योदय 6:42, सूर्यास्त 6:23 बजे। अमृत काल रात्रि 3:11 से翌日 4:52 तक।
अशुभ काल: राहुकाल दोपहर 2:00 से 3:28, यमगंड प्रातः 6:42 से 8:10, गुलिककाल 9:37-11:05 एवं 3:16-4:03। दुर्मुहूर्त 10:36-11:23 एवं 3:16-4:03। गुरुवार को भद्रा छाया का प्रभाव।
गुरुवार नारायण, पितांबरा मां व बृहस्पति को समर्पित। पीला वस्त्र, केला, हल्दी-गुड़ चने दाल व पीली मिठाई अर्पित करें। यह पंचांग सफलता का आधार बनेगा।