
भारतीय हॉकी के इतिहास में परगट सिंह का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 1985 चैंपियंस ट्रॉफी में जर्मनी के खिलाफ 1-5 से पिछड़ चुकी भारतीय टीम को उन्होंने सिर्फ छह मिनटों में चार गोल ठोककर 5-5 से बराबरी पर ला खड़ा किया। यह कमाल उन्हें देशव्यापी हीरो बना गया।
5 मार्च 1964 को पंजाब के जालंधर में पैदा हुए परगट को बचपन से हॉकी का जुनून था। स्कूल के बाद लायलपुर खालसा कॉलेज में दाखिले के साथ जूनियर टीम में जगह मिली। हांगकांग टूर्नामेंट में सीनियर डेब्यू ने उन्हें स्टार साबित कर दिया।
1986 में हॉलैंड पर 3-2 की जीत में उनकी भूमिका अहम रही। 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलंपिक में कप्तानी संभाली। अर्जुन अवॉर्ड 1989 और पद्म श्री 1998 से सम्मानित।
सन्यास के बाद राजनीति में कूदे। पंजाब के विधायक बने, खेल मंत्री रहे। परगट की कहानी हार से जीत की मिसाल है, जो युवाओं को प्रेरित करती रहेगी।