
सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मध्य पूर्व में तेज होते तनाव को वैश्विक संस्थाओं की नाकामी का प्रतीक बताया है। विदेश दौरे के दौरान मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में असफल रही दशकों पुरानी कूटनीति पर गहरी नाराजगी जताई।
कार्नी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव, आईएईए की निगरानी और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का न्यूक्लियर खतरा बरकरार है। उन्होंने कहा कि यह संकट मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ढांचे की विफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
कनाडा लंबे समय से ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य सूत्रधार मानता रहा है। कार्नी ने ईरान सरकार और उसके सहयोगियों पर भारी तबाही मचाने का आरोप लगाया, जिसमें सैकड़ों मौतें हुईं, जिनमें कनाडाई नागरिक भी शुमार हैं।
हालांकि, उन्होंने ईरान को परमाणु हथियारों से रोकने के सभी प्रयासों का समर्थन दोहराया। लेकिन अमेरिका और इजरायल द्वारा बिना संयुक्त राष्ट्र या सहयोगियों से सलाह लिए की गई कार्रवाइयों पर चिंता जताई।
अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है, कार्नी ने जोर देकर कहा। उन्होंने ईरान के नागरिक ठिकानों पर हमलों की कड़ी निंदा की और सभी से संयम बरतने की अपील की।
कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है। बड़े संघर्ष से बचने के लिए परमाणु प्रसार और आतंकवाद रोकने वाले ठोस समझौते जरूरी हैं। हालिया ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।