
क्वेटा, 3 मार्च। बलूचिस्तान में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसके वरिष्ठ कमांड काउंसिल के आदेश पर ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ में पकड़े गए सात पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों को मार दिया गया। यह कार्रवाई बलोच नेशनल कोर्ट के फैसले के आधार पर की गई, जिसमें इन सैनिकों को जबरन गायब करने, निर्दोषों पर अत्याचार और युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया गया।
बीएलए के बयान के अनुसार, 14 फरवरी को कैदियों की अदला-बदली के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, जिसे बाद में 14 दिन तक बढ़ाया गया। लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इस दौरान गनशिप, ड्रोन और भारी सैन्य अभियानों से जवाब दिया, जिससे समूह को लगा कि विरोधी रिहाई में गंभीर नहीं है।
समूह का मानना है कि पाकिस्तान केवल ताकत की भाषा समझता है। सभी सात कैदियों की सजा मंगलवार को लागू कर दी गई। बीएलए ने पाक सेना की उच्च कमान को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया।
पिछले महीने ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ में बीएलए ने क्वेटा, नोश्की, मस्तुंग समेत कई जिलों में 10 घंटे लंबे समन्वित हमले किए। दावा है कि 84 सुरक्षा कर्मी मारे गए, 18 पकड़े गए, 30 से अधिक सरकारी संपत्तियां नष्ट हुईं और 20 वाहनों को आग लगा दी गई।
लड़ाकों ने कई इलाकों में पाक बलों की आवाजाही रोकी और अस्थायी नियंत्रण हासिल किया। यह घटना बलूचिस्तान के संघर्ष को नई ऊंचाई देती है, जहां शांति की सारी उम्मीदें धूमिल पड़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब हस्तक्षेप की जरूरत है।