
बेंगलुरु में मंगलवार को राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया जब केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर जोरदार हमला बोला। फोन टैपिंग विवाद के बीच कुमारस्वामी ने सीएम पर शासन की अनदेखी कर राजनीतिक प्रतिशोध में लिप्त रहने का इल्जाम लगाया।
यह विवाद उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के फोन टैपिंग के आरोपों से भड़का, जो खुद सीएम पद के दावेदार हैं। सिद्धारमैया ने इन इल्जामों को सिरे से खारिज किया है।
एक्स पर कई पोस्ट साझा कर कुमारस्वामी ने कहा कि सीएम शासन से ज्यादा जवाबी कार्रवाई में मशगूल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल सार्वजनिक सवालों का जवाब दिया है, कोई निराधार आरोप नहीं लगाए।
विधानसभा में 140 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार आंतरिक कलह में उलझी है, विकास को भुला दिया है, यह कहते हुए कुमारस्वामी ने फोन टैपिंग को कांग्रेस की कुर्सी की जंग से जोड़ा। विपक्ष ही नहीं, मीडिया के कुछ वर्गों में भी यही शक है।
उन्होंने सरकार से सीधे जवाब देने की मांग की। अपने सीएम काल में फोन टैपिंग से इनकार करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि बिना पूर्ण बहुमत के उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए, सत्ता के दुरुपयोग की कोई जरूरत न थी।
कांग्रेस पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इमरजेंसी का जिक्र किया। विधायकों की गुटबाजी, सीएम-उपमुख्यमंत्री के सार्वजनिक विवाद और विज्ञापनों से मीडिया धमकी लोकतंत्र विरोधी हैं, उनका कहना था।
जाति-धर्म आधारित विभाजनकारी राजनीति को शासन के लिए घातक बताते हुए कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया को पीएम मोदी को विवाद में घसीटने पर फटकारा। विपक्ष के खिलाफ सत्ता का दुरुपयोग आम हो गया है।
‘सिद्धारमैया जांच टीम’ कहकर एक जांच एजेंसी का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने चयनात्मक जांच का आरोप लगाया। निजी टिप्पणी में सिद्धारमैया के पुराने राजनीतिक सफर को याद कर कहा कि इतिहास फैसला करेगा। यह विवाद कर्नाटक की राजनीति को और गरमा रहा है।