
मुंबई। प्रसिद्ध शेफ, लेखक और फिल्म निर्देशक विकास खन्ना ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें बताया कि उनकी फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की शुरुआत 2011 की होली पर वृंदावन से हुई। रंग-बिरंगे त्योहार के बीच उन्होंने सफेद साड़ियों में चुपचाप बैठी विधवाओं को देखा, जिन्हें रंगों की एक किरण भी न छू सकी।
यह दृश्य उनके दिल को छू गया। आसपास गुलाबी, पीले रंगों की धूम थी, लेकिन ये महिलाएं त्योहार से वंचित थीं। इसी पल उन्होंने एक छोटी-सी कहानी लिखी, जो उपन्यास बनी और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म।
फिल्म का सफर शानदार रहा। कान्स में लॉन्च, 100 से ज्यादा फिल्म फेस्टिवल्स में प्रदर्शन। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में खड़े होकर तालियां मिलीं। वाशिंगटन डीसी के यूएस कैपिटल में विधवाओं के लिए रोजगार और सम्मान की पैरवी का मौका। ग्लोबल विडोज के साथ ग्लोबल एंबेसडर बने।
2020 एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए योग्य घोषित, अमेजन प्राइम पर रिलीज। लेकिन खन्ना के लिए असली जीत त्योहारों से जोड़ने की ताकत है। ‘हर व्यक्ति को रंग और खुशी का हक है,’ उन्होंने कहा। इससे प्रेरित ‘बंगलो’ पहल शुरू की, जहां जश्न तब तक अधूरा जब तक सब टेबल पर न हों।
दुबई में रहते हुए भी वृंदावन की विधवाओं के लिए शुभकामनाएं, जो अब गुलाल से रंगीं हैं।