
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक व्यापार को खतरे में डाल दिया है। इन बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने भारत के निर्यात-आयात पर पड़ने वाले असर की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक्स पर बताया कि संबंधित मंत्रालयों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यापार सुविधा भागीदारों के साथ उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। बैठक में वैश्विक संकटों और उनके भारतीय व्यापार पर प्रभाव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
मंत्री ने व्यापार को सुचारू रखने के सरकारी प्रयासों पर जोर दिया। निर्यात प्राधिकरणों को प्रक्रियात्मक छूट दी जा रही है, कस्टम्स व बंदरगाह अधिकारियों के साथ तालमेल बढ़ाया जा रहा है ताकि मंजूरी में कोई रुकावट न हो। साथ ही, वित्तीय और बीमा संस्थानों से निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर संपर्क कायम रहेगा।
इसके लिए ‘सप्लाई चेन रेजिलिएंस’ हेतु इंटर-मिनिस्ट्रीयल ग्रुप (आईएमजी) का गठन किया गया है। इसमें वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय, पोत परिवहन, पेट्रोलियम मंत्रालय और सीबीआईसी के अधिकारी शामिल हैं। यह समूह विभागों के बीच समन्वय, निगरानी और तत्काल कदम सुनिश्चित करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार व्यापारियों के हितों की पूरी तरह रक्षा करेगी। अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद स्थिर व्यापारिक माहौल बनाना हमारा लक्ष्य है।
व्यापारियों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू: एडीजी1-डीजीएफटी@गव.इन पर ईमेल या 1800-572-1550, 1800-111-550 पर कॉल करें।
ये कदम भारत को वैश्विक संकटों से मजबूत बनाएंगे।