
मासिक धर्म के दिनों में योग करना चाहिए या नहीं, यह सवाल लंबे समय से महिलाओं के मन में कौतुहल बनाए हुए है। समाज में फैले मिथकों के अनुसार इस दौरान कोई शारीरिक गतिविधि नुकसानदायक मानी जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत इसके विपरीत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार हल्के योगासन न केवल सुरक्षित हैं बल्कि दर्द, थकान और मूड स्विंग्स से राहत दिलाते हैं।
यह प्राकृतिक तरीका शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक सिद्ध होता है। पीरियड्स में पूर्ण विश्राम की बजाय हल्की गतिविधियां लक्षणों को कम करती हैं।
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि इस समय व्यायाम वर्जित है। वास्तव में, चुनिंदा आसन मांसपेशियों को शिथिल कर परेशानियां घटाते हैं। भारी एक्सरसाइज से परहेज करें।
विशेषज्ञ अनुशंसित आसन हैं- बालासन, सुप्त बद्ध कोणासन, विपरीत करणी, मार्जरिआसन और शवासन। इन्हें अपनी क्षमता अनुसार धीरे-धीरे अपनाएं। अत्यधिक दर्द या रक्तस्राव पर चिकित्सक से परामर्श लें।
योग से पेट की ऐंठन और दर्द में कमी आती है। पेल्विक मसल्स रिलैक्स होती हैं। सांस व्यायाम थकान भगाते हैं। मानसिक तनाव घटता है, चिड़चिड़ापन नियंत्रित रहता है।
पीठ दर्द में भी आराम मिलता है। रक्त संचार बेहतर होता है, पाचन सुधरता है और ऊर्जा बढ़ती है। नियमित अभ्यास से मासिक चक्र स्वस्थ रहता है।
महिलाओं को पीरियड्स को सकारात्मक रूप से अपनाने के लिए योग अपनाना चाहिए, जो स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।