
होली का रंग-गुलाल और स्वादिष्ट व्यंजनों का जश्न शरीर पर भारी पड़ जाता है। गुजिया, दही भल्ला और तले हुए नाश्ते से पेट भारी हो जाता है और थकान छा जाती है। ऐसे में शरीर को डिटॉक्स करना अनिवार्य हो जाता है ताकि त्योहार की अधिकता से बची ऊर्जा वापस लौट आए।
आयुर्वेद की चार सरल विधियां अपनाकर आप होली के बाद की सुस्ती को भगा सकते हैं। सबसे पहले सुबह नीम की दातुन से दिन शुरू करें। नीम रक्त शुद्धि के साथ-साथ आंतों को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करता है। बाजार में नीम पाउडर आसानी से उपलब्ध है।
फिर नंगे पैर घास पर टहलें। यह प्रकृति से जुड़ाव शरीर में नई स्फूर्ति लाता है और तले-भुने भोजन की भारीपन को दूर भगाता है।
दिन भर नारियल पानी और हल्दी वाला पानी पिएं। होली के केमिकल रंग शरीर में घुस सकते हैं, जो हानिकारक होते हैं। ये दोनों पेय विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते हैं और अंगों को स्वस्थ रखते हैं।
नाश्ते में केवल फल खाएं। फल हल्के होते हैं, जल्दी पचते हैं और भरपूर पोषण देते हैं। शाम को नारियल तेल से मालिश करें। इससे त्वचा की रूखापन दूर होता है, जलन शांत होती है और गहरी नींद आती है। इन स्टेप्स से होली का असर मिटाकर नई शुरुआत करें।