
वॉशिंगटन, 2 मार्च। व्हाइट हाउस ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2026 व्यापार नीति एजेंडा जारी किया, जिसमें जोरदार ढंग से कहा गया कि ‘अमेरिका वापस लौट आया है।’ इस एजेंडे में टैरिफ को और मजबूत करने, व्यापार नियमों पर सख्ती और प्रमुख समझौतों पर पुनर्विचार का वचन दिया गया है।
दस्तावेज में चित्रित किया गया है कि हाइपर-ग्लोबलाइजेशन के दौर में अमेरिका ने 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां गंवाईं, 70 हजार से ज्यादा कारखाने बंद हुए और 2020 से बाइडेन काल के अंत तक व्यापार घाटा 40 प्रतिशत उछला। व्यापार को आर्थिक शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बताते हुए कहा गया कि अमेरिका को वही उत्पादन करना चाहिए जो वह खरीदता है। मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और संबंधित सेवाओं से ऊंची तनख्वाहें, नवाचार और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
प्रशासन ने टैरिफ नीति की शुरुआती जीतों का बखान किया। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक हर महीने वस्तु व्यापार घाटा कम हुआ। चीन के साथ घाटा 32 प्रतिशत घटा, 2000 के बाद पहली बार वह सबसे बड़ा घाटा साझेदार नहीं रहा। निर्यात में उछाल आया, एआरटी कार्यक्रम से वस्तुओं-सेवाओं का निर्यात 199.8 अरब डॉलर बढ़कर 3.4 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड बना। पूंजीगत वस्तुओं में 9.9 प्रतिशत वृद्धि।
‘यह महज बयानबाजी नहीं, आंकड़े गवाही देते हैं।’ 2026 की छह प्राथमिकताएं: एआरटी जारी रखना, नियम प्रवर्तन, सप्लाई चेन सुरक्षा, यूएसएमसीए समीक्षा, चीन व्यापार प्रबंधन और वैश्विक मंचों पर अमेरिकी हित।
एआरटी के तहत अर्जेंटीना से ताइवान तक सौदे, भारत-जापान-दक्षिण कोरिया-ईयू के साथ ढांचागत समझौते। साझेदार टैरिफ घटाएंगे, अमेरिका पारस्परिक टैरिफ रखेगा। भारत ने औद्योगिक वस्तुओं पर 99 प्रतिशत टैरिफ हटाए, ईयू ने 100 प्रतिशत।
चीन पर: डब्ल्यूटीओ प्रवेश से नौकरियां गईं, लेकिन संतुलित व्यापार चलेगा—बुसान ट्रंप-शी समझौता पहला कदम। रक्षा मंत्री हेगसेथ के हवाले से औद्योगिक आधार को युद्ध-तैयार बनाने और सहयोगियों के साथ खनिज सौदे का आह्वान।
2026 में यूएसएमसीए समीक्षा का नेतृत्व, नवीनीकरण शर्तों पर। लिंकन की तर्ज पर पुरानी आदतें तोड़ने का संदेश, वैश्विक संकट में नई सोच-अभियान से अमेरिका को मजबूत बनाना।