
झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग धाम होली से एक दिन पहले अनोखी परंपरा निभाता है। ‘हरिहर मिलन’ नामक इस उत्सव में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण अपने आराध्य शिव से मिलने आते हैं और दोनों देव रंग-गुलाल से होली खेलते हैं। इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को सुबह 5:30 बजे से यह धार्मिक आयोजन प्रारंभ होगा।
तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, यह पौराणिक कथा रावण से जुड़ी है। लंका नरेश ने कठोर तप से शिव को प्रसन्न किया और शिवलिंग लेकर लंका लौटने लगे। रास्ते में बैद्यनाथ धाम पर वृद्ध ब्राह्मण रूप में विष्णु ने उन्हें रोका। शिवलिंग जमीन पर रखते ही स्थापित हो गया, जहां माता सती का हृदय गिरा था।
हरिहर मिलन पर कन्हैया जी की मूर्ति मंदिर से निकलती है, बैजू मंदिर के पास झूला झूलती है और फिर महादेव के पास पहुंचकर गुलाल लगाती है। शिव को मालपुआ भोग चढ़ाया जाता है। यह मिलन देवघर में होली का शुभारंभ करता है।
यह परंपरा हरी-हर की एकता का प्रतीक है। भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं। होली के रंगों से पहले यह दिव्य लीला सभी को मोह लेती है, जो वैष्णव-शैव भेद मिटाती है।