
बिहार के भागलपुर कैंप जेल के बाहर एक ऐसी त्रासदीपूर्ण घटना घटी जिसने हर किसी की आंखें भर आईं। बबरगंज थाना क्षेत्र के शिवलोक कॉलोनी, मोहद्दीनगर निवासी पुरुषोत्तम कुमार और रवि कुमार एक साल से एनडीपीएस केस में जेल की सलाखों के पीछे हैं। इसी दौरान उनकी मां का देहांत हो गया। मां की आखिरी तमन्ना थी कि बेटों को एक बार देख लें, लेकिन जेल नियमों ने यह संभव नहीं होने दिया।
परिजनों ने जेल प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट प्रक्रिया का हवाला देकर अगली सुबह का इंतजार करने को कहा गया। अंतिम संस्कार का समय नजदीक आते ही गमगीन परिवार अर्थी लेकर जेल द्वार पर पहुंच गया। घंटों मिन्नतें कीं, नारेबाजी तक हुई। मृतका की बहन पुष्पा ने बताया, सुबह से प्रयासरत थे, लेकिन प्रक्रिया बाधा बनी।
माहौल गंभीर देख जेलर प्रकाश सिंह ने मानवीय करुणा दिखाई। विशेष अनुमति से अर्थी को जेल परिसर में ले जाया गया। बेटों ने मां के पार्थिव शरीर को नम नैनों से विदाई दी। दादाजी बोले, लंबे इंतजार के बाद जेलर का शुक्रिया।
यह घटना परिवार और कानून के बीच की कशमकश को उजागर करती है। गेट पर खड़े लोग भी भावविभोर हो रो पड़े। बिहार में यह कहानी ममता की अमर गाथा बन गई, जो जेल सुधार की मांग को बल देती है।