
नई दिल्ली। भारत ने ट्रांसनेशनल हिंसा या संगठित अपराध में अपनी संलिप्तता के आरोपों को एक बार फिर सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इन्हें आधारहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और किसी ठोस प्रमाण से रहित बताया। खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े विवाद पर बोलते हुए मंत्रालय ने कहा कि ऐसे गंभीर मसलों को सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं से ही निपटाया जाना चाहिए।
कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से 앞े विशेष प्रेस ब्रीफिंग में पूर्व विदेश सचिव पी. कुमारन ने निज्जर मामले पर सवालों का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “भारत ट्रांसनेशनल हिंसा या अपराध में लिप्त होने के किसी भी दावे को साफ तौर पर नकारता है। ये आरोप बेबुनियाद हैं, राजनीतिक साजिश से प्रेरित हैं और हमारे बार-बार सबूत मांगने के बावजूद कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं दिया गया। ऐसे विषयों को कानून प्रवर्तन और अदालती प्रक्रिया के दायरे में ही रखा जाना चाहिए।”
निज्जर हत्याकांड की कनाडाई जांच पर उन्होंने कहा कि मामला वहां की स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रहा है और भारत न्यायिक परिणामों का सम्मान करता है। संवेदनशील केसों पर सार्वजनिक टिप्पणियों से परहेज की सलाह दी गई।
यह विवाद तब चरम पर पहुंचा जब पूर्व कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में दावा किया कि निज्जर हत्याकांड में भारत का हाथ है। इसके बाद कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त समेत अधिकारियों को जांच का निशाना बनाया, जिससे कूटनीतिक तनाव बढ़ गया। भारत ने इसे बकवास करार दिया और ओटावा पर खालिस्तानी चरमपंथियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
हालांकि सुरक्षा सहयोग जारी है। कुमारन ने बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठकें 2025-26 में हुईं, जहां आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। संयुक्त कार्यदल सक्रिय है, कांसुलर संवाद में प्रत्यर्पण आदि मुद्दे उठते हैं। सुरक्षा अधिकारी नियुक्त होंगे जो मादक तस्करी और अपराध नेटवर्क पर सूचना साझा करेंगे।
कार्नी यात्रा के दौरान ये तंत्र मजबूत हो सकते हैं, जो संबंधों को नई दिशा देगा।