
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की संसद में सोमवार को हंगामे की स्थिति बन गई जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे। भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए उन्होंने अपनी ताकत का लोहा मनवाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ के नारों से उन्हें शर्मसार कर दिया।
जरदारी ने नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र में शांति का मंत्र पढ़ा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी इलाकों का इस्तेमाल शांति भंग करने के लिए किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती। भारत और अफगानिस्तान को पाकिस्तान की सीमित क्षमता दिखाने का दावा करते हुए उन्होंने परमाणु शक्ति का बखान किया।
लेकिन उनके भाषण के दौरान पीटीआई समर्थक विपक्षी दलों ने इमरान खान की रिहाई की मांग तेज कर दी। अमेरिकी गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान की भागीदारी पर भी सवाल उठे। जनता के इजरायल विरोधी रुख को देखते हुए इसे ‘झूठा पीस बोर्ड’ बताते हुए विरोध हुआ।
अफगानिस्तान से संघर्ष और ईरान पर अस्पष्ट नीति के बीच यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता को उजागर करती है। जरदारी का भारत पर दोषारोपण विपक्ष के गुस्से का शिकार हो गया, जो देश की एकजुटता के लिए खतरा बन रहा है।