
मुंबई के संगीत सम्राट हरिहरन ने अपने पचास वर्षों के शानदार करियर पर खुलकर चर्चा की। उनकी मधुर वाणी ने बॉलीवुड से लेकर गजल और सूफी तक लाखों दिल जीत लिए। दस से अधिक भाषाओं में गीत गा चुके इस दिग्गज ने बताया कि असली सफलता रियाज और मौलिकता से आती है।
नए गायकों को नसीहत देते हुए हरिहरन बोले, ‘सोशल मीडिया की रातोंरात शोहरत का पीछा न करें। संगीत जीवनभर की साधना है। अपनी अनोखी आवाज पहचानें, नकल से दूर रहें। यही लंबे समय तक टिकती है।’
रियाज को उन्होंने सर्वोच्च स्थान दिया। ‘मैं रोज सुबह अभ्यास करता हूं। तकनीक बदल जाए, रियाज की ताकत बरकरार रहती है। यह गले की सटीकता और भावनाओं को निखारता है।’
उद्योग के बदलावों पर हरिहरन ने कहा कि बाजार हर दशक में नया रूप लेता है। ‘तकनीक को साधन बनाएं, स्वामी नहीं।’ उनका नया एल्बम ‘जान मेरी’ पारंपरिक रागों को आधुनिकता से जोड़ता है। युवाओं से अपील की कि शास्त्रीय आधार मजबूत रखें।
फिल्मी और स्वतंत्र संगीत के बीच तालमेल पर बोले, ‘इंडिपेंडेंट म्यूजिक में रचनात्मकता आजाद होती है।’ अरिजीत जैसे सिंगर्स पर कहा कि हर युग में नए सितारे चमकते हैं, लेकिन संगीत की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती।
हरिहरन का यह अनुभव नए कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत है।