
जिनेवा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग के प्रमुख वोल्कर तुर्क ने यूएनएचआरसी के 61वें सत्र में भारत की सिविल सोसाइटी की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की नागरिक समाज गतिविधियां देश की मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
तुर्क ने अपनी हालिया भारत यात्रा के दौरान एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने का जिक्र करते हुए कहा, “भारत में सिविल सोसाइटी का कार्य देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। ये संगठन लोकतंत्र की रक्षा और अल्पसंख्यकों के हक सुनिश्चित करने में अग्रणी हैं। नागरिक समाज को बिना किसी बाधा के स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।”
भारत का यह मॉडल वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक है, जहां नागरिक भागीदारी लोकतंत्र को सशक्त बनाती है। दूसरी ओर, तुर्क ने पाकिस्तान की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। वहां मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से जुड़े दो वकीलों को सोशल मीडिया पोस्ट्स के कारण 17 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई है।
“पाकिस्तान में वकीलों और अधिकारों के रक्षकों को केवल सोशल मीडिया अभिव्यक्ति के लिए सजा देना दुर्भाग्यपूर्ण है,” उन्होंने कहा। इसी तरह, चीन पर अस्पष्ट कानूनों से मानवाधिकार दमन बंद करने की अपील की। शिनजियांग में उइगर, अन्य मुस्लिम समुदायों और तिब्बतियों के उत्पीड़न पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
जॉर्जिया में नागरिक अधिकारों पर पाबंदियां और वेनेजुएला में मनमानी हिरासत पर भी तुर्क ने नाराजगी जताई। उन्होंने आपातकालीन उपायों की समीक्षा और सिविल सोसाइटी को सार्वजनिक पहलों में भागीदारी की मांग की। 16 मार्च को इस पर विस्तृत अपडेट देने का वादा किया।
तुर्क का यह बयान भारत की लोकतांत्रिक छवि को मजबूत करता है तथा अन्य देशों को मानवाधिकारों के प्रति सजग रहने की चेतावनी देता है।