
मुंबई। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने अपने पहले कार्यकाल वर्ष के पूर्ण होने पर इसे बाजार के लिए ‘सुधारों का वर्ष’ करार दिया। वित्तीय उथल-पुथल, भू-राजनीतिक संकटों और तकनीकी उलटफेरों से भरे इस दौर में हितधारकों ने कंधे से कंधा मिलाकर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेश सरलीकरण, बाजार विकास, नियामकीय ढांचा मजबूती और इक्विटी विस्तार जैसे क्षेत्रों में ठोस कदम उठाए गए। चार आधारभूत सिद्धांतों—विश्वास, पारदर्शिता, टीमवर्क व टेक्नोलॉजी—पर केंद्रित होकर सेबी ने संतुलित नियमन का लक्ष्य हासिल किया।
न तो अति-कठोरता, न शिथिलता—ऐसा इष्टतम नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रवर्तन व निगरानी तंत्र को सशक्त बनाया गया। पांडेय ने टीम की मेहनत की सराहना की, जो निवेशक सुरक्षा के मोर्चे पर ‘सुदर्शन’ एआई टूल के जरिए उल्लेखनीय सफलता लाया।
यह उपकरण अवांछित फिनफ्लुएंसर्स की शिनाख्त कर कार्रवाई सुनिश्चित करता है। सेबी के तीन स्तंभ—निवेशक संरक्षण, बाजार विकास व नियमन—पर कायम रहते हुए भविष्य में प्रक्रियाओं को और सहज बनाया जाएगा।
एसएमई प्लेटफॉर्म्स के जरिए छोटे उद्यमों को बाजार से जोड़ने पर बल, लेकिन पांडेय ने निवेशकों को सतर्क किया—12-14 फीसदी रिटर्न हर साल की गारंटी नहीं। दीर्घावधि समझदारी जरूरी है। सेबी का सफर चुनौतियों के बीच उपलब्धियों से समृद्ध बना रहेगा।