
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति इन दिनों जोरदार चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां लंबे समय से चला आ रहा गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की हार का सिलसिला टूटने की कगार पर है। भाजपा अपनी पहली जीत की तलाश में है, तो कांग्रेस पुरानी मजबूती हासिल करने को बेताब है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
वर्तमान विधायक जाकिर हुसैन ने पिछले चुनाव में भाजपा के सुजीत दास को 92 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। लेकिन अब राज्य में भाजपा का प्रभाव बढ़ने से समीकरण बदल सकते हैं।
जंगीपुर भागीरथी नदी के किनारे बसा महत्वपूर्ण शहर है, जो उप-मंडलीय मुख्यालय भी है। यहां का जंगीपुर बैराज गंगा और भागीरथी के जल प्रवाह को नियंत्रित करता है। ऊर्जा क्षेत्र में यह इलाका अहम है, जहां फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशन (2100 मेगावाट) और सागरदिघी थर्मल पावर स्टेशन (1600 मेगावाट) राज्य की बिजली जरूरतें पूरी करते हैं।
बीड़ी उद्योग, छोटे-मोटे कारखाने और बांग्लादेश सीमा के पास होने से सीमापार व्यापार इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। राजनीतिक इतिहास में 1957 से अब तक 16 चुनाव हुए। कांग्रेस ने 8 बार, आरएसपी ने 4 बार, निर्दलीय और टीएमसी ने 2-2 बार जीत हासिल की। शुरुआती दो चुनाव (1957, 1962) ही हिंदू प्रत्याशियों के नाम रहे।
परिसीमन के तहत जंगीपुर नगरपालिका, रघुनाथगंज और सूती ब्लॉकों की कुछ पंचायतें शामिल हैं। इस चुनावी जंग का नतीजा न सिर्फ स्थानीय समीकरण बदलेगा, बल्कि पूरे बंगाल की सियासत पर असर डालेगा।