
आयुर्वेद में जीभ को शरीर के स्वास्थ्य का दर्पण माना जाता है। वायरल संक्रमण या बीमारी के समय डॉक्टर सबसे पहले जीभ और आंखों की जांच क्यों करते हैं? क्योंकि जीभ त्रिदोष—वात, पित्त, कफ—के असंतुलन का स्पष्ट संकेत देती है। आइए जानें विभिन्न रंगों के राज़।
जीभ पर मोटी सफेद परत कफ दोष और आम (विषाक्त पदार्थ) की अधिकता दर्शाती है। अपच के कारण शरीर में जमा ये टॉक्सिन सर्दी-खांसी, मोटापा और सुस्ती लाते हैं। बचाव के लिए अदरक वाली चाय, हल्का भोजन और त्रिकटु चूर्ण अपनाएं।
हल्का लाल या गुलाबी रंग पित्त की वृद्धि का पता लगाता है। गर्मी से गैस, कब्ज, एसिडिटी और थकान होती है। विटामिन बी-12 की कमी भी यही दिखाती है। ठंडे फल, नारियल पानी और पुदीना लें।
पीली झलक पित्त-आम के संयोजन से लीवर पर बोझ बता रही है। आंतें प्रभावित होकर हार्मोन असंतुलन पैदा करती हैं। हरड़, बहेड़ा से युक्त त्रिफला रात को लें।
सूखी-फटी जीभ वात दोष और रस धातु की कमी का चिह्न है। बार-बार प्यास लगे तो तिल के तेल से कवल धारा करें।
प्रतिदिन जीभ जांचें, दोष संतुलित रखें और स्वस्थ जीवन जिएं।