
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को लेकर बड़ा बयान दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में उन्होंने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को हटाने वाली रणनीति को ईरान पर दोहराने का संकेत दिया। उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना चार से पांच हफ्तों तक हमले जारी रख सकती है, बिना देश के ज्यादातर हिस्से को नुकसान पहुंचाए।
ट्रंप ने वेनेजुएला को आदर्श उदाहरण बताया। ‘वहां हमने सिर्फ शीर्ष नेताओं को हटाया, बाकी सब वैसे ही चला। दो लोगों को छोड़कर सभी ने नौकरी बरकरार रखी।’ यही तरीका ईरान में अपनाया जा सकता है।
हमलों की अवधि पर उन्होंने कहा, ‘हमारा प्लान चार-पांच हफ्ते का था। हमारे पास गोला-बारूद की कोई कमी नहीं, दुनिया भर में स्टॉक पड़ा है।’ लड़ाई शुरू हुए महज 36 घंटे ही बीते हैं, लेकिन ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों के नुकसान को स्वीकारा। ‘तीन जानें भी ज्यादा हैं, अनुमान इससे कहीं अधिक है।’
उन्होंने ईरानी नौसेना पर भारी प्रहार का दावा किया, जिसमें नौ जहाज और मुख्यालय तबाह हो गए। सत्ता परिवर्तन पर उनकी राय बदली। पहले कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधिकारी जनता के सामने सरेंडर कर देंगे।
अयातुल्लाह खामेनेई के बाद नेतृत्व पर ट्रंप ने कहा, ‘मेरे पास तीन शानदार विकल्प हैं, बाद में बताऊंगा।’ लेकिन अंततः ईरानियों पर छोड़ा, ‘वे सालों से चाहते थे, अब मौका है।’
नए नेता व्यवहारिक हुए तो प्रतिबंध हटाने पर विचार करेंगे, लेकिन वादा नहीं। ‘जल्दबाजी न करें, हम समय से आगे हैं।’ फारस की खाड़ी में अरब देशों का साथ जरूरी नहीं।
ट्रंप के बयान मध्य पूर्व में नई भू-राजनीतिक हलचल पैदा कर रहे हैं।