
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचने से पश्चिम एशिया का बड़ा हिस्सा हवाई क्षेत्र के लिए बंद हो गया है। इससे वैश्विक विमानन उद्योग पर भारी संकट मंडरा रहा है, जहां सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और बाकी रास्ते बदलने पड़े हैं।
रविवार तक रणनीतिक हवाई गलियारों पर आपातकालीन पाबंदियां लगीं, जिससे एयरलाइंस को फ्लाइट्स कैंसल करने या लंबे रूट अपनाने पड़े। अनुमानों के मुताबिक 700 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जबकि कई सौ को संघर्ष क्षेत्रों से दूर भेजा गया। शुरूआती सुरक्षा कदम अब व्यापक परिचालन संकट में बदल चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए महत्वपूर्ण पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र या तो पूरी तरह बंद हैं या सख्त नियंत्रण में। ईरान, इजरायल सहित कई देश प्रभावित, जिससे सामान्य हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
दुबई, अबू धाबी, दोहा जैसे गल्फ हब ट्रैफिक रोक चुके हैं, देरी पूरे नेटवर्क में फैल रही। एशिया-यूरोप-अमेरिका जोड़ने वाली उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर, जो मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं।
भारतीय विमानन कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित, खासकर गल्फ रूट्स पर। इंडिगो ने तीन दिनों में 350 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल कीं—1 मार्च को 166, 2 को 162, 3 को 43। यह उनके दैनिक 2100-2200 उड़ानों का 7-8 प्रतिशत है।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी गल्फ-वेस्ट एशिया सेवाएं निलंबित या रूट बदले। एमिरेट्स, लुफ्थांसा जैसी बड़ी एयरलाइंस भी कैंसिलेशन और बदलाव कर रही हैं।
विमानों को लंबे रास्ते लेने पड़ रहे, फ्यूल खर्च, समय और लागत बढ़ी। उद्योग जो पुराने संकटों से उबर रहा, उसके लिए यह नया आघात। तनाव कम न होने पर लंबी रुकावट संभव।