
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या ने विश्व भर के कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में हुई इस घटना से मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में धकेल सकता है।
46 वर्षों के शिया शासन के इस प्रमुख मोड़ ने तेहरान को जवाबी कार्रवाई पर उतारू बना दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग अवरुद्ध हो गया, दुबई हवाईअड्डा बंद हो चुका है, जिससे तेल व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायोगाध्यक्ष वीना सिकरी ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा, ‘यह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए करारा प्रहार है। ओमान की मध्यस्थता वाली जिनेवा वार्ताएं प्रगति पर थीं, ईरान रियायतें देने को तैयार था, लेकिन इजरायल ने पहले हमला बोल दिया, जिसमें अमेरिका भी कूद पड़ा।’
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने इसे वॉशिंगटन-तेल अवीव की सैन्य सफलता माना, लेकिन शासन परिवर्तन पर सवाल उठाए। उन्होंने उन्नत खुफिया जानकारी का जिक्र किया, जिसने खामेनेई सहित उनके परिजनों को निशाना बनाया।
महेश कुमार सचदेव ने खामेनेई के 36 वर्षों के शासन की सराहना की। उन्होंने व्यावहारिकता और वैचारिक दृढ़ता का संतुलन बनाए रखा, आंतरिक गुटों, धर्मगुरुओं, अभिजात वर्ग और आर्थिक ताकतों के बीच सामंजस्य बिठाया। आलोचकों ने उन्हें क्रूर कहा, लेकिन उन्होंने इस्लामी क्रांति को एकजुट रखा।
अब बाजारों में उथल-पुथल मची है। तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, व्यापार रुक गया है। यह घटना न केवल क्षेत्रीय समीकरण बदलेगी, बल्कि वैश्विक विकास को वर्षों प्रभावित करेगी।