
मशहूर फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर पुरानी शिक्षा प्रणाली पर जोरदार प्रहार किया है। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि रट्टा मारने वाली यह व्यवस्था अब अप्रचलित हो चुकी है। एआई के जमाने में याद करने की कोई कीमत नहीं बची। पुराना फॉर्मूला—पढ़ो, रटो, पास हो जाओ, नौकरी पकड़ो—अब काम नहीं आता।
जब जानकारी सीमित थी, तब यह सिस्टम ठीक था। डॉक्टर बीमारियां रटते, इंजीनियर सूत्र याद करते, वकील केस लॉ दोहराते। लेकिन आज एआई सेकंडों में करोड़ों दस्तावेज खंगाल लेता है। मेडिकल छात्र सालों शरीर रचना सीखते हैं, एआई फटाक से डायग्नोसिस कर देता है। इंजीनियर सर्किट डिजाइन पर पसीना बहाते, एआई कोड लिखकर संरचनाएं बेहतर बना देता है।
वर्मा ने मेडिकल शिक्षा का उदाहरण दिया—5 साल स्नातक, 2 साल स्नातकोत्तर, 2-3 साल विशेषज्ञता। कुल 10 साल! फिर भी एआई जांचता है, रोबोट सर्जरी करते हैं। ऐसे कोर्स में बच्चों को क्यों ठूंस रहे माता-पिता, जो भविष्य में बेरोजगारी दें? गरीब घरों के बच्चे माता-पिता की गलतफहमियों का शिकार हो रहे हैं।
पुरानी मान्यताओं के बलिदान स्थल पर ये बच्चे चढ़ाए जा रहे। वर्मा ने सलाह दी—बच्चों को एआई में निपुण बनाएं। विद्रोह करें, माता-पिता-शिक्षकों को नजरअंदाज कर एआई पर दांव लगाएं। वृद्धजन बदलाव से घबराते हैं, लेकिन सिस्टम आज्ञापालन को पुरस्कृत करता है।
समय आ गया है पुरानी प्रणाली को उखाड़ फेंकने का, वरना वह खुद ढह जाएगी। समझदारी से योजना बनाएं, मेहनत करें ताकि युवा नासमझ बड़ों की भेंट न चढ़ें। नहीं तो युवा खुद विद्रोह कर लेंगे।