
हैदराबाद के पुराने शहर में रविवार को शिया समुदाय ने भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का कड़ा विरोध जताया। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में शहीद हुए खामेनेई की मौत की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
पूरी हवेली, नूर खान बाजार, दारुलशिफा जैसे शिया बहुल क्षेत्रों में काले वस्त्र धारण किए पुरुष, महिलाएं और बच्चे खामेनेई की तस्वीरें थामे नारे लगाते नजर आए। दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए प्रेरणास्रोत रहे खामेनेई की शहादत ने समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है।
सभ को संबोधित करते हुए एक प्रमुख शिया नेता ने कहा कि खामेनेई ने जुल्म के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और जालिमों के आगे कभी झुके नहीं। उन्होंने मुसलमानों में एकजुटता की कमी को इस घटना का प्रमुख कारण बताते हुए एकता का आह्वान किया।
तंजीम-ए-जाफरी संगठन के बुलावे पर मजहर-ए-इब्ने-खातून से शुरू हुई रैली में हजारों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के चेहरों पर शोक व्याप्त था, कई खामेनेई की फोटो दिखाते हुए रोते दिखे।
शहर प्रशासन ने किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुराने शहर में पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। ईरान के हैदराबाद कॉन्सुलेट में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाकर शोक व्यक्त किया गया।
शनिवार को तेहरान में हुए हमलों में 86 वर्षीय खामेनेई अपने कार्यालय में शहीद हो गए। ईरानी मीडिया के अनुसार उनकी बेटी, पोता, दामाद और बहू भी मारी गईं। रक्षा मंत्री आमिर नसीरजादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर की भी मौत की पुष्टि हुई।
यह घटना न केवल ईरान बल्कि पूरी शिया दुनिया के लिए दुखद है। हैदराबाद के प्रदर्शन इसकी गूंज को दर्शाते हैं, जो वैश्विक राजनीति में नए मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं।