
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। वहां से नीले ग्रह के बजाय रंग-बिरंगी रोशनी की परतें दिखाई देती हैं – लाल, हरा, बैंगनी और पीला। इसे वैज्ञानिक एयरग्लो कहते हैं। यह पृथ्वी की प्राकृतिक चमक है जो रात के आकाश को पूरी तरह अंधेरे से बचाए रखती है।
नासा के मुताबिक, ऊपरी वायुमंडल में सूरज की किरणें परमाणुओं को उत्तेजित कर देती हैं। रात में ये ऊर्जा प्रकाश के रूप में निकलती है। यह ऑरोरा से अलग है क्योंकि इसमें सौर हवाओं की जरूरत नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सूर्य ऊर्जा काफी है। कभी-कभी इलेक्ट्रॉन की टक्कर से भी यह चमक बढ़ जाती है।
रात का आकाश कभी पूरी तरह काला नहीं होता। प्रदूषण और चांदनी हटाने पर भी हल्की चमक बनी रहती है, जो सभी तारों की रोशनी का 10 प्रतिशत है। अंतरिक्ष से यह पृथ्वी को चमकदार गोले जैसा दिखाता है, जो 80 से 650 किलोमीटर ऊंचाई पर फैला आयनोस्फियर है। यहीं जीपीएस और अंतरिक्ष यात्राएं होती हैं।
रंग गैसों पर निर्भर करते हैं। हरा ऑक्सीजन से, लाल नाइट्रोजन रिएक्शन से। पतले वायुमंडल में परमाणु लंबे समय तक चमकते हैं। यह चमक सूरज और मौसम से बदलती रहती है।
एयरग्लो आयनोस्फियर की गतिविधियों का संकेतक है। यह कणों की गति, तापमान और घनत्व बताता है, जो अंतरिक्ष मौसम और पृथ्वी के मौसम को जोड़ता है। आईएसएस की तस्वीरें वैज्ञानिकों को ऊपरी वायुमंडल की निगरानी में मदद करती हैं। यह अध्ययन भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है।