
ब्रोंकियल अस्थमा यानी दमा एक जटिल श्वसन समस्या है, जिसमें सांस फूलना, सीने में जकड़न, लगातार खांसी और सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आना आम है। मौसम परिवर्तन, ठंडी हवा, धूलकण, पराग या एलर्जेंस के संपर्क से यह और गंभीर हो जाती है।
आयुर्वेद में इसे कफ-वात दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जो श्वासनलिकाओं में सूजन और कफ जमाव पैदा करता है। सही आहार-विहार, दिनचर्या और सरल जड़ी-बूटियों से इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
खान-पान में सतर्कता बरतें। रात का भोजन हल्का व गर्म रखें। दही, केला, तला-भुना, खट्टा और ठंडे ड्रिंक्स से परहेज करें, ये कफ वर्धक हैं। अदरक पानी, हल्दी दूध, गर्म सूप और दिनभर गुनगुना पानी श्वास पथ को स्वच्छ रखेगा।
घरेलू उपचार आजमाएं: बहेड़ा चूर्ण 3-5 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार। कंटकारी मूल चूर्ण शहद या काढ़े से। सरसों तेल में सेंधा नमक मिलाकर छाती-पीठ पर मालिश। भाप और गुनगुने पानी से गरारे तुरंत राहत दें।
धूम्रपान त्यागें, धूल-एलर्जी से बचें, घर स्वच्छ-हवादार रखें। तनाव नियंत्रण महत्वपूर्ण। डॉक्टर जांच नियमित रखें, आपातकाल में तत्काल मदद लें। आयुर्वेद चिकित्सकीय सलाह से अपनाएं।