
नई दिल्ली। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने शनिवार को बारामती एयरफील्ड पर 28 जनवरी को हुए विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। यह रिपोर्ट शुरुआती सबूतों और तथ्यों पर आधारित है, जो अस्थायी स्वभाव की है। इसमें दिए गए विवरण से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आईसीएओ के मानकों और भारतीय नियमों के तहत जांच का मकसद केवल भविष्य के हादसों को रोकना है, न कि किसी को दोषी ठहराना। दोनों पायलट पहले बारामती आ चुके थे और इलाके की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ थे। उनके पास वीआईपी उड़ानों और बिना नियंत्रण वाले एयरफील्ड्स पर व्यापक अनुभव था।
विमान में मौजूद पैरामेडिक द्वारा किया गया प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट नकारात्मक रहा, जिसकी पुष्टि वीडियो और स्लिप से हुई। हादसे वाले दिन दृश्यता मात्र 3,000 मीटर थी, जो वीएफआर के लिए जरूरी 5,000 मीटर से कम थी।
एएआईबी ने छोटे हवाईअड्डों पर सख्त निगरानी, लाइसेंसिंग की जांच और लैंडिंग-मौसम सुविधाओं में तत्काल सुधार की सिफारिश की है। जांच जारी है, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर का डेटा अमेरिकी एनटीएसबी की मदद से निकाला जाएगा।
यह रिपोर्ट छोटे हवाई पट्टियों पर सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है, जिससे नियामकों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ा है।