
अगरतला। त्रिपुरा का फ्लोरीकल्चर क्षेत्र पिछले सात वर्षों में 332 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगा चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने शनिवार को बताया कि सरकारी प्रयासों और स्थानीय बाजारों की बढ़ती जरूरतों ने किसानों की कमाई में भी उछाल ला दिया है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 से फूलों की खेती का रकबा तेज रफ्तार से फैल रहा है। अच्छे दाम और लगातार मांग से किसान परंपरागत फसलों को छोड़ फूलों की ओर मुड़ रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र किसानों के लिए सोने की खान साबित हो रहा है, जहां हालात अनुकूल हों वहां सबसे ज्यादा मुनाफा देता है।
बिशालगढ़ जैसे इलाकों में पहले सब्जियां उगाई जाती थीं, अब फूलों से अधिक आय हो रही है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना और गांव स्तर पर नौकरियां पैदा करना है। फूल सजावट के अलावा होली के प्राकृतिक रंग, दवाएं और इत्र में काम आते हैं, इसलिए इनकी मांग कभी कम नहीं होती।
राज्य की उपजाऊ जमीन, भरपूर बारिश और जलवायु गेंदा, ग्लैडियोलस, गुलाब जैसी फसलों के लिए बिल्कुल सही है। पारंपरिक फ्लोरीकल्चर 60 प्रतिशत बढ़ चुका है। हाईटेक खेती में एंथुरियम, ऑर्किड, जरबेरा पर 124 प्रतिशत की प्रगति हुई है।
200 वर्ग मीटर में खेती करने वाले किसान हर महीने 10,000 रुपये से ज्यादा कमा रहे हैं। मजबूती के लिए बदरघाट गार्डन में 400-400 वर्ग मीटर का आर्केडियम और हार्डनिंग सेंटर ‘सेंटर ऑफ फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केपिंग’ बनाया गया, जिस पर 4.50 करोड़ खर्च हुए।
लेम्बूचरा में 65 कानी पर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन फ्लावर्स’ बन रहा है। यहां ऑर्किड से क्राइसेंथेमम तक उगेंगे, साथ ही ट्रेनिंग और पौधे मिलेंगे। मंत्री आशावादी हैं कि त्रिपुरा फूलों का हब बनेगा।