
नई दिल्ली। देश का आभूषण बाजार जो वर्तमान में 85-90 अरब डॉलर का है, 2030 तक 130-150 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। शादी-ब्याह के सीजन में बढ़ती मांग, प्रीमियम ज्वेलरी की लोकप्रियता, संगठित रिटेल का विस्तार और उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा इस उछाल का आधार बनेगा।
इंडिया मंडपम में इन्फॉर्मा मार्केट्स इंडिया द्वारा आयोजित ‘डीजेजीएफ सिग्नेचर 2026’ के दूसरे संस्करण का उद्घाटन होते ही उत्तर भारत के आभूषण कारोबार को मजबूत शुरुआत मिली।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि प्रदर्शकों-खरीदारों की भारी भागीदारी व्यापारिक उत्साह और क्षेत्र की परिपक्वता को दिखाती है। उन्होंने बताया कि सोने पर 3 प्रतिशत और चांदी पर 5 प्रतिशत प्रीमियम अब आम हो गया है। छोटे स्टॉक चक्र और हर 8-15 दिन में लगने वाले मेले जोखिम कम कर खरीदारी को आसान बनाते हैं।
गुप्ता ने नियामकीय बदलावों पर जोर दिया- बीआईएस के नेतृत्व में एचयूआईडी ट्रांसफर से पारदर्शिता, चांदी पर अनिवार्य हॉलमार्किंग और पीएमएलए के लिए एआई निगरानी।
रत्न-आभूषण क्षेत्र जीडीपी में 7-8 प्रतिशत, निर्यात में 12-14 प्रतिशत योगदान देता है और 50 लाख से ज्यादा को रोजगार। भारत 90 प्रतिशत वैश्विक हीरे संसाधित करता है और सोने का बड़ा खरीदार है।
इन्फॉर्मा के एमडी योगेश मुद्रास ने 130 अरब डॉलर के लक्ष्य के साथ संरचित विकास की बात कही। दिल्ली बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राम अवतार वर्मा ने आयोजन की भव्यता की सराहना की। यह बाजार सुनहरे दौर में है।