
चंगनास्सेरी, केरल। सेंट बर्चमैन्स कॉलेज के शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारत को प्रौद्योगिकी अपनाने वाले से सृजनकर्ता राष्ट्र बनाने का संदेश दिया। 28 फरवरी को आर्चबिशप कावुकट्टू हॉल में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कॉलेज की सदी भर की यात्रा को राष्ट्र निर्माण और चरित्र गठन की प्रेरक कहानी करार दिया।
कार्यालय संभालने के बाद केरल का यह उनका तीसरा दौरा था, जिसे उन्होंने विशेष बताया। ‘केरल अब केरलम बन चुका है,’ कहकर राज्य की सांस्कृतिक गरिमा और आत्मविश्वास की सराहना की। 1922 में स्थापित यह कॉलेज औपनिवेशिक दौर में भी बौद्धिक क्रांति का केंद्र रहा, जहां ज्ञान और नैतिकता का संगम हुआ।
प्रसिद्ध पूर्व छात्रों प्रेम नजीर, पूर्व मुख्यमंत्री वासुदेवन नायर और ओमन चांडी का उल्लेख करते हुए कहा कि दो मुख्यमंत्रियों को जन्म देना कॉलेज का गौरवपूर्ण योगदान है। ‘शिक्षा चरित्र निखारती है, शिक्षित नागरिक राष्ट्र रचते हैं।’ उन्होंने आजीवन सीखने और परस्पर सम्मान पर बल दिया।
प्रौद्योगिकी पर जोर देते हुए बोले, ‘अब अपनाने का समय नहीं, भारत को क्रिएटर नेशन बनना है ताकि विश्व हमारी तकनीक अपनाए।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को युवाओं की ऊर्जा से जोड़ा। ऐसे संस्थान जिम्मेदार नागरिक, आविष्कारक और नेतृत्व तैयार करेंगे।
कॉलेज के मोटो ‘कैरिटास वेरा नोबिलिटास’ (दान सच्चा बड़प्पन) को याद करते हुए कहा, सच्ची महानता देने में है – धन, समय, ज्ञान या मार्गदर्शन में। ‘स्वार्थी जीवन अधूरा है।’ छात्रों से समाज को लौटाने और मूल्यों पर दृढ़ रहने की अपील की।
‘आप कॉलेज की दूसरी सदी हैं। बड़े सपने देखें, मेहनत करें।’ बर्चमैन्स सेंटर फॉर इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और डॉ. के.एम. अब्राहम सेंटर का उद्घाटन किया। राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी, मंत्री वी.एन. वसावन सहित गणमान्य उपस्थित। शताब्दी नया युग की शुरुआत है।