
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को 2 प्रतिशत चढ़कर 72.48 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध की स्थिति बनने से मध्य पूर्व के तेल निर्यात पर ब्रेक लग सकता है, जिससे कीमतें 80 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।
यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया के 20 प्रतिशत से ज्यादा कच्चे तेल की आवाजाही का केंद्र है। मिसाइल हमलों और ईरान की नौसेना को नेस्तनाबूद करने के लक्ष्य के बीच तनाव चरम पर है। तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिए हैं, जिससे ‘युद्ध प्रीमियम’ जुड़ गया है।
बार्कलेज बैंक के अनुसार, आपूर्ति में बड़ा रुकावट आने पर कीमतें तेजी से चढ़ेंगी, हालांकि तत्काल रुकावट की आशंका कम है। बाजार अब हर खबर पर नजर रखे हुए है।
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, जो 85 प्रतिशत तेल आयात करता है। ऊंची कीमतें आयात बिल बढ़ाती हैं, महंगाई को हवा देती हैं और विकास को ठेस पहुंचाती हैं। लेकिन भारत ने खाड़ी पर निर्भरता कम की है। अमेरिका, अफ्रीका जैसे स्रोतों से खरीद बढ़ाई गई है।
तेल कंपनियों के पास हफ्तों का स्टॉक है और वैकल्पिक रास्तों से आपूर्ति जारी है। रणनीतिक भंडार पुदुर (2.25 एमएमटी), विशाखापत्तनम (1.33 एमएमटी), मंगलौर (1.5 एमएमटी) और चांदीखोल में मजबूत हैं। आपातकाल में इनका इस्तेमाल कर कंपनियों को राहत दी जा सकती है। भारत की यह तैयारी वैश्विक संकट में ढाल बनेगी।