
नई दिल्ली। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट ने भारत की आर्थिक तस्वीर को नया आयाम दिया है। संशोधित जीडीपी सीरीज से देश की अर्थव्यवस्था का आकार काफी बड़ा हो गया है और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अब विकास की रफ्तार का मुख्य इंजन बनकर उभरा है।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो दूसरी तिमाही के 8.4 प्रतिशत से थोड़ी कम है। फिर भी पूरे वर्ष के लिए 7.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो पुरानी सीरीज के 7.4 प्रतिशत से बेहतर है।
रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक जीडीपी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2023 की जीडीपी अब 261 लाख करोड़ रुपये है, जबकि पुरानी सीरीज में यह 161 लाख करोड़ थी। वित्त वर्ष 2025 के लिए आंकड़ा 188 लाख करोड़ से बढ़कर 300 लाख करोड़ हो गया।
यह वृद्धि बेहतर आंकड़ा संग्रहण, मैन्युफैक्चरिंग में डबल डिफ्लेशन विधि और विस्तृत मूल्य सूचकांकों से संभव हुई। मैन्युफैक्चरिंग ने वित्त वर्ष 2024 में 12.7 प्रतिशत और 2026 में 11.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
वर्ष 2026 की तीनों तिमाहियों में इस क्षेत्र ने दहाई अंक छुए—पहली में 10.6, दूसरी में 13.2 और तीसरी में 13.3 प्रतिशत। सेवाएं भी मजबूत हैं, वर्ष 2026 में 9 प्रतिशत वृद्धि का पूर्वानुमान।
तीसरी तिमाही में सेवाओं की रफ्तार 9.5 प्रतिशत रही, जिसमें वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, आईटी ने 11.2 प्रतिशत का प्रदर्शन किया। कृषि क्षेत्र में हालांकि सुस्ती है—वर्ष 2026 में 2.4 प्रतिशत वृद्धि, तीसरी तिमाही में 1.4 प्रतिशत।
नई सीरीज नया बेस ईयर और उन्नत पद्धतियों पर आधारित है। मैन्युफैक्चरिंग की यह तेजी भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाएगी, बशर्ते कृषि को भी बल मिले।