
अयोध्या से बसपा नेता विश्वनाथ पाल ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के अकेले उतरने का ऐलान किया है। एनडीए और इंडिया गठबंधनों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल खुद को मजबूत बताते हैं, वे गठबंधन क्यों कर रहे हैं। अकेले लड़ो तो जमीन की हकीकत सामने आ जाएगी।
आईएएनएस से बातचीत में पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘लोग बसपा को कमजोर कहते हैं, लेकिन असली कमजोर वही है जो बैसाखी का सहारा ढूंढता है। बसपा मजबूत है और पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी।’
सपा के कांशीराम जयंती को पीडीए दिवस बनाने पर उन्होंने अखिलेश यादव के नाटक की पोल खोली। ‘मुख्यमंत्री रहते उन्होंने जयंती की छुट्टी खत्म की और कांशीराम नामक जिले व योजनाओं का नाम बदल दिया। मायावती ने कासगंज जिला बनाया था, सपा ने नाम हटाया। बसपा ने कई संस्थान और योजनाएं शुरू कीं, सपा ने बंद कर दीं।’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पाल ने कहा कि राजनीति को धर्म से दूर रखना चाहिए। डॉ. अंबेडकर के संविधान ने सभी जाति-धर्म वालों को समान सम्मान दिया है। सरकार किसी गुरु या शंकराचार्य का अपमान न होने दे।
2027 चुनाव में बसपा का यह फैसला दलित-बहुजन वोटों को फिर संगठित कर सकता है, जिससे यूपी की सियासत में नया मोड़ आए।