
भारत के छोटे-मध्यम उद्यमों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। लगभग 360 कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के एसएमई प्लेटफॉर्म से मुख्य बोर्ड पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित हो चुकी हैं। यह प्रवास क्षेत्र की परिपक्वता और मजबूती को दर्शाता है।
बी2के एनालिटिक्स के आंकड़ों से पता चलता है कि बीएसई एसएमई से 199 और एनएसई इमर्ज से 158 कंपनियां अब मेनबोर्ड पर सूचीबद्ध हैं। इससे इन्हें व्यापक निवेशक आधार और बेहतर बाजार पहचान मिली है।
मेनबोर्ड पर जाना मतलब एसएमई एक्सचेंज से शेयरों को मुख्य स्टॉक एक्सचेंज पर ले जाना है, जो पूंजी जुटाने के नए द्वार खोलता है। बी2के एनालिटिक्स के सीईओ रिताबन बसु ने बताया कि यह कदम खुदरा व संस्थागत निवेशकों से फंडिंग के बेहतर मौके देता है।
उन्होंने कहा, ‘पूंजी की बड़ी पहुंच के साथ-साथ कंपनी की प्रतिष्ठा बढ़ती है, जिससे शीर्ष प्रतिभा आकर्षित करना सरल होता है। कठोर अनुपालन से मूल्यांकन मजबूत होता है और शेयरों में तरलता बढ़ती है, निवेशकों को आसान निकास देती है।’
माइग्रेशन के लिए मानदंड सख्त हैं: औसत बाजार पूंजीकरण 100 करोड़ से अधिक, तीन साल तक परिचालन लाभ 15 करोड़ से ऊपर (कोई साल 10 करोड़ से नीचे न हो), तीन वर्षीय एकसमान व्यवसाय और मुख्य कारोबार से 50% से ज्यादा आय।
क्षेत्रवार, टेक्सटाइल में 44, मशीनरी-उपकरण में 33 और फूड-तंबाकू में 29 कंपनियां मेनबोर्ड पर हैं। फंड जुटाने में भी उछाल: 2023 में 179 कंपनियों ने 4,823 करोड़ जुटाए, अब 268 ने 12,105 करोड़—दोगुनी से अधिक वृद्धि।
यह रुझान एसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बना रहा है।