
नई दिल्ली। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के 57वें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों को संबोधित किया। उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने संस्थान की छह दशक पुरानी विरासत का जिक्र किया, जिसने पत्रकारिता और संचार क्षेत्र के कई दिग्गज तैयार किए जो देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।
जनवरी 2024 में डीम्ड यूनिवर्सिटी बने आईआईएमसी की भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए उन्होंने मीडिया इनक्यूबेशन सेंटरों की प्रशंसा की। मीडिया में एआई, डेटा एनालिटिक्स, स्टोरीटेलिंग और सोशल मीडिया ने कहानियों के निर्माण को बदल दिया है। एवीजीसी क्षेत्र, एनिमेशन, गेमिंग आदि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की एवीजीसी-एक्सआर मिशन जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। संसद टीवी में इंटर्नशिप का अवसर भी ऑफर किया।
कलम की ताकत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सत्य परक राय राष्ट्र को दिशा दे सकती है। ‘सत्य लिखो निडर होकर, विकसित भारत बनाओ।’ रेटिंग्स के पीछे न भागें, ईमानदारी अपनाएं। पत्रकार एएन शिवरामन की मिसाल दी।
डिजिटल चुनौतियों पर कहा कि सोशल मीडिया ने फेक न्यूज और ध्रुवीकरण बढ़ाया है। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देकर राष्ट्रीय हितों की डिजिटल रक्षा पर बल दिया। पत्रकार सकारात्मक बदलाव लाएं, सेना का हौसला बढ़ाएं।
अर्थव्यवस्था की तेजी, डिजिटल विस्तार में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण। उपलब्धियों की खबरें प्रमुखता से दें। विज्ञापन-पीआर छात्रों को रचनात्मकता के नैतिक उपयोग की सलाह।
समापन में कहा, तकनीक बदलेगी लेकिन पत्रकारिता के मूल्य अटल। ‘सत्य को हृदय में बसाओ, कोई न हरा सके।’ जागरूक भारत के निर्माण में योगदान की उम्मीद।