
नई दिल्ली। ‘राइजिंग भारत समिट-2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की प्रगति यात्रा पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की ताकत रातोंरात नहीं बनती, बल्कि पीढ़ियों के ज्ञान, संस्कृति, मेहनत और अनुभव से गढ़ी जाती है। गुलामी की लंबी अवधि ने हमारी क्षमता को हीनभाव से भर दिया, जबकि विदेशी विचारधाराओं ने हमें अशिक्षित अनुयायी सिद्ध किया।
आजादी के बाद भी यह मानसिकता बनी रही, जिसका असर व्यापार समझौतों में दिखता है। विकसित देश भारत से डील करने को आतुर क्यों? क्योंकि निराशा से उबरता आत्मविश्वासी भारत। 2014 से पूर्व की कमजोरी में कोई साझेदार न आता।
ग्यारह वर्षों में नई ऊर्जा आई: 3 करोड़ अंधेरे घरों से सौर ऊर्जा में शीर्ष, मेट्रो नेटवर्क विश्व तृतीय, वंदे भारत जैसी तेज रेलें। एआई युग में भारत नेतृत्व कर रहा, अपना स्टार्टअप तंत्र विकसित। एआई समिट गौरव का पल था, लेकिन कांग्रेस ने विदेशियों के सामने वैचारिक पोल खोल दी।
नाकामी की हताशा में देश को बदनाम करने की कोशिश। गांधीजी को ढाल बनाकर पाप छिपाते, परिवार को श्रेय देते। विपक्ष का मतलब वैकल्पिक दृष्टि, न कि अंधविरोध। जनता चार दशकों से कांग्रेस को सबक सिखा रही, 1984 के 400 सीटों से अब चार राज्यों तक सिमट गई।
बंगाल में आयुष्मान भारत रोकी गई, गरीबों का मुफ्त इलाज छीना। भारत का उदय जनता को विवेक दे रहा, जो कांग्रेस को वोट के अयोग्य ठहरा रही।