
आयुर्वेद में दालों को अमृत तुल्य माना गया है, जो शरीर के दोषों को संतुलित कर रोगों से लड़ती हैं। भारत की मिट्टी में उगने वाली ये दालें—मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा, सफेद चना, काला चना और सूखी मटर—स्वास्थ्य के लिए अनमोल हैं। आइए जानें इनके गुण, लाभ और सावधानियां।
मूंग दाल की ठंडी तासीर पाचन कमजोरियों, एसिडिटी, डायबिटीज, पीसीओएस व थायरॉइड को शांत करती है। यह हल्की पचती है, लेकिन कफ अधिकता, सर्दी या ठंडे मौसम में रात को न लें।
मसूर दाल गर्माहट देती है, वजन कम करने व फैटी लिवर में सहायक। जोड़ों का दर्द, बवासीर, पाचन या किडनी समस्याओं में परहेज करें।
अरहर दाल कमजोरी मिटाती है, स्वादिष्ट व पौष्टिक। एसिडिटी में रात को मसालेदार न खाएं।
चना दाल भूख काबू करती है, डायबिटीज के लिए सुरक्षित। कमजोर पाचन वाले रात से दूर रहें।
उड़द दाल जोड़ों को मजबूत बनाती, थकान भगाती। मोटापा, कफ, बुखार, एसिडिटी में न लें।
राजमा प्रोटीन-फाइबर का खजाना, लेकिन गैस, आईबीएस, थायरॉइड या वजन घटाने में त्यागें।
सफेद चना मसल्स बढ़ाता, कब्ज, एसिडिटी, पीसीओएस में संयम रखें।
काला चना स्टैमिना व आयरन देता, गैस, पेट फूलना, जोड़ दर्द में कम मात्रा।
सूखी मटर ऊर्जा प्रदान करती, सर्दी, बलगम, गैस, कमजोर पाचन में सीमित।
इन दालों को प्रकृति अनुसार अपनाएं, आयुर्वेदिक जीवनशैली से स्वस्थ रहें।