
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमले आतंकियों के खिलाफ नहीं, बल्कि बेगुनाह नागरिकों को डराने का कुत्सित प्रयास हैं। एक नई रिपोर्ट में इस्लामाबाद की इस पाखंडपूर्ण रणनीति को बेनकाब किया गया है, जो अफगान संप्रभुता का खुला उल्लंघन है। रमजान के पवित्र मास में पूर्वी अफगान प्रांतों नंगरहार और पक्तिका पर 22 फरवरी को हुए हमलों में कम से कम 13 निर्दोष मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) के अनुसार सात अन्य घायल हुए, जबकि अफगान रेड क्रिसेंट ने नंगरहार में 18 मौतें गिनाईं। तालिबानी अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने 20 हताहतों की पुष्टि की। पाकिस्तान ने 70-80 आतंकियों के सफाए का दावा किया, मगर कोई प्रमाण नहीं दिया।
‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ के विशेषज्ञ माइकल एरिजांती ने इसे ‘शर्मनाक पैटर्न’ करार दिया। उन्होंने कहा, “यह टीटीपी या आईएसकेपी पर नहीं, अफगान नागरिकों पर सीधा हमला है।” रमजान में शांति के समय पाक जेट्स ने निर्दोषों पर बम बरसाए।
जवाब में तालिबान उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने शुक्रवार सुबह इस्लामाबाद के फैजाबाद, नौशेरा, जमरूद और एबटाबाद पर अफगान एयरफोर्स के हमलों का ऐलान किया। ये गुरुवार रात काबुल, कंधार व पक्तिया पर पाकिस्तानी हमलों का बदला थे।
रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र व यूरोपीय संघ से जांच व खुफिया जानकारी साझा करने की मांग की गई। अफगानिस्तान ने सुरक्षा परिषद में शिकायत दर्ज कराई, तालिबान ने सोचा-समझा जवाब देने की चेतावनी दी। भारत ने हमलों की निंदा कर पाकिस्तान को अलग-थलग करने वाली रणनीति अपनाई, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।