
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव हुआ। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने जवाब में कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास है। गांवों की दशा सुधारना हमारी प्राथमिकता है।
पेसा कानून को आदिवासियों की सुरक्षा कवच बताते हुए उन्होंने ग्रामसभा को जल-जंगल-जमीन की रक्षा का अधिकार देने पर जोर दिया। ग्रामसभा को सच्चा मालिक बनाने के प्रयास तेज हैं, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर बैठकें आयोजित करने की सुविधा शामिल है। सहायक सचिव पदों पर महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
बीवीजी रामजी योजना में 10 करोड़ मानव दिवस सृजित हो चुके हैं। केंद्र पर हजारों करोड़ के बकाया और 15वें वित्त आयोग की राशि रोकने का आरोप लगाया। अबुआ आवास के 1.90 लाख घर बन चुके, सभी किस्तें समय पर जारी।
स्वयं सहायता समूहों ने 2.72 करोड़ पौधे लगाए, जो पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे। भाजपा के प्रदीप प्रसाद ने खर्च की धीमी गति पर सवाल उठाए। 9500 करोड़ मिले लेकिन मात्र 367 करोड़ खर्च, अन्य विभागों में भी यही हाल।
नए बजट का औचित्य क्या जब पुराना खर्च न हो? अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप, छापों में नकदी बरामद। जयराम महतो ने ग्रामीण-शहरी खाई पाटने, सड़क निर्माण में पारदर्शिता की मांग की। अमित यादव ने लंबित आवास पूरा करने को कहा।
कांग्रेस व सीपीआई एमएल ने पेसा सुधार, ग्रामसभा सशक्तिकरण पर बल दिया। सरकार ने उपलब्धियां गिनाईं तो विपक्ष ने कार्यान्वयन पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।