
नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने संस्थान की भूमिका और भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। दो संस्थानों के एकीकरण से बने इस संस्थान का उद्देश्य विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान में मजबूत योगदान देना है।
डॉ. रायसम ने बताया कि संस्थान प्रमाण-आधारित नीति निर्माण, गहन शोध और प्रभावी संचार के जरिए देश की प्रगति में सहायक बनेगा। इसके अलावा, 15 शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन डायमंड ओपन एक्सेस मॉडल पर किया जाता है, जो इंजीनियरिंग से जीव विज्ञान तक विविध क्षेत्रों को कवर करती हैं। पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक उत्पादों पर विशेष पत्रिकाएं भी शामिल हैं।
आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में उन्होंने भारतीय पत्रिकाओं को मजबूत करने की अपील की। वैज्ञानिकों से संपादकीय बोर्ड, समीक्षा या शोध पत्र जमा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ज्ञान प्रसार के पूरे तंत्र को सशक्त बनाने से जुड़ी है।
कार्यशाला का केंद्रबिंदु सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम रहा। डॉ. शेव की टीम ने अमेरिका, ताइवान आदि देशों के मॉडल की तुलना कर भारत के लिए रणनीतियां सुझाईं। डॉ. रायसम ने स्पष्ट किया कि विदेशी मॉडल की अंधानुकरण नीति नहीं चलेगी। भारत की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप समाधान अपनाने होंगे, वैश्विक मानकों के साथ।
अध्ययन परिणाम प्रस्तुत कर विशेषज्ञ सुझाव लिये जाएंगे और व्हाइट पेपर तैयार होगा। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की गतिशीलता को देखते हुए निरंतर अध्ययन जारी रहेगा, ताकि भारत इस क्षेत्र में मजबूत बने।