
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला के छात्रों और शिक्षकों ने सड़क के खतरनाक अंधे मोड़ों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक क्रांतिकारी स्मार्ट सिस्टम विकसित किया है। मात्र 6000 रुपये की लागत से तैयार यह तकनीक चालकों की आंख बनकर काम करेगी, जो सामने से आ रही गाड़ियों को पहले ही भांप लेगी।
ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में जहां सड़कें तंग हैं और दृश्यता नाममात्र की होती है, वहां यह सिस्टम वरदान साबित होगा। मोड़ के पास लगे कैमरा और सेंसर लगातार निगरानी रखते हैं। कंप्यूटर विजन से वाहनों की गति व दूरी का आकलन कर टक्कर का खतरा होने पर तत्काल अलर्ट सक्रिय हो जाता है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत है एज कंप्यूटिंग—डेटा साइट पर ही प्रोसेस होता है, जिससे कोई देरी नहीं। वास्तविक परीक्षणों में यह कम संसाधनों पर भी शानदार प्रदर्शन कर चुका है। दुर्घटना होने पर झटके सेंसर सक्रिय होकर पुलिस, एम्बुलेंस को सूचना भेज देते हैं।
एनआईटी टीम ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स को जोड़कर एक मजबूत सुरक्षा जाल तैयार किया है। पेटेंट प्राप्त यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होने से सड़क हादसों में भारी कमी ला सकती है। संस्थान निदेशक ने इसे समाज हित में गर्व का क्षण बताया। देशभर के ब्लाइंड स्पॉट्स अब सुरक्षित हो सकते हैं।