
भारत की उपभोग अर्थव्यवस्था में जेन एक्स (1965-1980 के बीच जन्मे) एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही है। रेडसीर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह पीढ़ी वित्त वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं पर 500 अरब डॉलर से अधिक खर्च करेगी। खास बात यह है कि प्रीमियम उत्पादों पर उनका झुकाव बढ़ेगा, जो बाजार को नई दिशा देगा।
प्रति व्यक्ति खपत में निरंतर वृद्धि इस बूम का आधार बनेगी। स्वास्थ्य देखभाल पर व्यय 17 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़कर 73 अरब डॉलर हो जाएगा। न्यूट्रास्यूटिकल्स 25 प्रतिशत की रफ्तार से 20 अरब डॉलर छू लेंगे, जो परिणाम-केंद्रित स्वास्थ्य दृष्टिकोण को दिखाता है।
सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल पर खर्च 8 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, क्योंकि रुझानों के बजाय उपचारों को प्राथमिकता मिल रही है। यात्रा में भी बदलाव साफ है—धीमी, आरामदायक और सुख-सुविधा वाली। वैकल्पिक आवास व बुटीक होटलों की मांग सालाना 25 प्रतिशत बढ़ी है।
इस पीढ़ी को अवकाश के लिए प्रीमियम केबिन और पांच सितारा होटल भाते हैं। बच्चों की शिक्षा पर शहरी परिवार प्रति वर्ष 10-20 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, कैम्ब्रिज-आईबी स्कूलों व विदेशी कार्यक्रमों को अपनाते हुए।
रेडसीर के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया कहते हैं, ‘जेन एक्स भारत की सबसे कम आंकी गई उपभोग शक्ति है। आर्थिक रूप से मजबूत, डिजिटल रूप से सशक्त और मूल्य-निष्ठ, वे स्वास्थ्य, गहन यात्रा, बेहतर घरों व टिकाऊ वस्तुओं पर विवेकपूर्ण खर्च करते हैं।’
एक अन्य रिपोर्ट में वेतनभोगी वर्ग उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के बाजार को 11 प्रतिशत सीएजीआर से 2029 तक 3 लाख करोड़ तक ले जाएगा। जेन एक्स का योगदान बाजार को प्रीमियम बनाएगा।