
भारतीय क्रिकेट के सुनहरे दौर में कर्षण घावरी का नाम एक मिसाल है। राजकोट में 28 फरवरी 1951 को जन्मे इस बाएं हाथ के हरफनमौला खिलाड़ी ने 1970 के दशक में अपनी घातक गेंदबाजी से दुनिया को हैरान कर दिया। सौराष्ट्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर छाए घावरी ने घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र और मुंबई के लिए शानदार प्रदर्शन किया। 159 प्रथम श्रेणी मैचों में 452 विकेट और 43 लिस्ट ए में 47 विकेट उनके खाते में हैं।
अंतरराष्ट्रीय पदार्पण वेस्टइंडीज के खिलाफ 1974 में टेस्ट से हुआ। 1975 में इंग्लैंड के विरुद्ध पहला वनडे खेला। 1981 तक चले करियर में 39 टेस्ट और 19 वनडे खेले। टेस्ट में 109 विकेट, वनडे में 15। निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाज के रूप में 913 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं।
करियर का चरम 1978-79 की वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज में आया। छह टेस्ट में 27 विकेट लेकर भारत को 1-0 से जीत दिलाई। कपिल देव के डेब्यू पर पाकिस्तान के खिलाफ उनका गेंदबाजी जोड़ी यादगार रही। 1975 और 1981 वर्ल्ड कप में भी टीम का हिस्सा रहे।
सन्यास के बाद कोचिंग में सक्रिय। 2006 में त्रिपुरा और 2019 में सौराष्ट्र के हेड कोच बने। 75 वर्ष की उम्र में भी युवाओं को दिशा-निर्देश दे रहे हैं। घावरी की कहानी प्रेरणा है कि मेहनत से कैसे बड़े सपने साकार होते हैं।